World Diabetes Day – डायबिटीज भगाएं माइक्रोग्रीन्स अपनाएं
2030 तक 101 मिलियन भारतीयों को हो सकती है डायबिटीज
अभी 77 मिलयन को भारत में है डायबिटीज, भारत दूसरे नंबर पर
एक्सपर्ट बोले- फूड बदले बिना संभव नहीं डायबिटीज से निजात
माइक्रोग्रीन्स ही है बायोएक्टिव कंपाउंड का खजाना
मोहित निझावन एवं संजय अरोड़ा अपने रिसर्च बेस्ड सेंटर “इक्कीस” के अंतर्गत दिल की बीमारी, डायबिटीज, कैंसर, कमजोर इम्यूनिटी, कमजोर हड्डियों एवं दांतों जैसी बीमारियों से बचने के लिए माइक्रोग्रीन का फार्म चलाते है, जिसमें 21 अलग किस्मों व फ्लेवर की माइक्रोग्रीन उगाई जाती है।
इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन की रिपोर्ट कहती है कि 2019 तक भारत में डायबिटीज के करीब 77 मिलियन मरीज थे, जिनकी संख्या 2030 तक 101 मिलियन हो सकती है तो 2045 तक यह आंकड़ा 134.2 मिलियन को छू सकता है। 20 से 79 आयु वर्ग को होने वाली डायबिटीज के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है। चीन में 2019 तक 116.4 मिलियन डायबिटीज के मरीज थे।
इकीसवीं सदी में हमारा फ़ूड कैसा हो ,करोना काल के बाद इस पर काफी रिसर्च हो रही है, विश्व डायबिटीज डे पर भारत के विश्व की डायबिटीज कैपिटल बनने की ओर अग्रसर होने पर हमें अपने फूड में काफी बदलाव लाने की आवश्यकता है , क्योंकि जैसा फूड होगा वैसी ही हमारी सेहत व इम्युनिटी होगी।
आज के दौर में हर तरह के आहार में ऑर्गेनिक सब्जियों का चलन काफी तेजी पर है। ऐसे में माइक्रोग्रीन्स का महत्व किसी से अछूता नहीं है। विशेषज्ञ स्टडी के हवाले से भी बताते हैं कि यह एक स्वास्थ्यवर्द्धक सुपर फूड है। कोमल बनावट, विशिष्ट ताजा स्वाद, एंटी ऑक्सीडेंट, मिनरल्स, विटामिन से भरपूर माइक्रोग्रीन्स का आमतौर पर हर तरह की डिश में सेवन कर सकते हैं। सलाद, सैंडविच, चटनी, रायता, दाल, सब्जी में और माइक्रोन्यूट्रिएंट से भरपूर आहार के रूप में सेवन किया जाता है जो परिपक्व सब्जियों के मुकाबले ज्यादा पौष्टिक तत्व, विटामिंस एंड मिनरल्स 40 गुणा होते हैं, एक बार तैयार हो चुकी माइक्रोग्रीन्स 6 से 7 दिनों तक यूज़ करने के लायक बनी रहती है। नियमित रूप से यदि इसका सेवन किया जाये तो इससे हमारा स्वास्थ्य एवं इम्यून सिस्टम दोनों ही मजबूत होते हैं, क्योंकि इसमें शरीर के लिए सभी जरूरी पोषक तत्व मिलते रहते है जो एक तंदुरुस्त शरीर की जरूरत होते हैं।
मोहित निझावन एवं संजय अरोड़ा अपने रिसर्च बेस्ड सेंटर “इक्कीस” के अंतर्गत दिल की बीमारी, डायबिटीज, कैंसर, कमजोर इम्यूनिटी, कमजोर हड्डियों एवं दांतों जैसी बीमारियों से बचने के लिए माइक्रोग्रीन का फार्म चलाते है, जिसमें 21 अलग किस्मों व फ्लेवर की माइक्रोग्रीन उगाई जाती है।
मोहित ने जानकारी देते हुए बताया कि दरअसल आजकल जो फूड हम रोजमर्रा खाते हैं वह संतुलित नहीं है, आई.सी.एम.आर, डब्ल्यू.एच.ओ. एवं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के अनुसार फलों व सब्जियों के सेवन से मधुमेह का खतरा काफी कम हो सकता है तथा संतुलित आहार की प्लेट में 350 ग्राम फल, 150 ग्राम दालें/अंडे और मांस , 90 ग्राम मेवे एवं बीज, 30 ग्राम फैट एवं तेल, 27 ग्राम व 240 ग्राम अनाज का सेवन आवश्यक है।
उसके साथ-साथ हाइड्रपानिक्स सेटअप्स बनाते है, जिसमें हर परिवार अपने पसंद की केमिकल फ्री सब्जियां घर पर ही ग्रो कर सकता है और जिसमें पानी की खपत भी मिट्टी की खेती के मुक़ाबले 90% कम होती है और इसमें कम जगह में आप अपने घर की सभी सब्जियां हाइड्रपानिक्स तरीके से उगा सकते हैं।
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