हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने जेलों में बढ़ती आत्महत्याओं, हिंसा और मानसिक स्वास्थ्य संकट पर लिया स्वतः संज्ञान
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा, सदस्य (न्यायिक) कुलदीप जैन तथा सदस्य दीप भाटिया की पीठ ने इस संबंध में विस्तृत आदेश पारित करते हुए राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब तलब किया है। आयोग ने कहा कि जेल में बंद व्यक्ति भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त गरिमामय जीवन, स्वास्थ्य सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं के अधिकार से वंचित नहीं किए जा सकते।
आयोग के समक्ष आए समाचार के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान हरियाणा में पंद्रह (15) अप्राकृतिक कैदी मौतें दर्ज की गईं और सभी मामलों में मृत्यु का कारण आत्महत्या बताया गया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि हरियाणा देश का एकमात्र राज्य है जहां जेल परिसर के भीतर आग्नेयास्त्रों से संबंधित हिंसक झड़पें दर्ज की गईं। इसके अतिरिक्त जेलों में मानसिक तनाव, अवसाद, नशा मुक्ति से जुड़ी समस्याएं, हिंसक संघर्ष, भीड़भाड़ तथा पर्याप्त परामर्श सुविधाओं की कमी जैसी गंभीर स्थितियां भी उजागर हुई हैं।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि हिरासतीय संस्थानों पर यह संवैधानिक दायित्व है कि वे कैदियों को आत्म-हानि, मानसिक आघात, हिंसा, अवसाद तथा सामाजिक अलगाव से सुरक्षित रखें। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि समय पर मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप, नियमित काउंसलिंग, मनोरोग विशेषज्ञों की निगरानी, भावनात्मक पुनर्वास, शिकायत निवारण व्यवस्था, पारिवारिक संपर्क और नशा मुक्ति उपचार के माध्यम से जेलों में आत्महत्या की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
आयोग ने हरियाणा कारागार नियम, 2022 के नियम 299 एवं 300 का विशेष उल्लेख किया, जिनमें आत्महत्या की रोकथाम तथा आत्मघाती प्रवृत्ति वाले कैदियों की निगरानी संबंधी महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रावधान निहित हैं। नियम 299 के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि कार्यशालाओं, नाई की दुकानों, दर्जी कक्षों, रसोईघरों तथा कैंटीनों में प्रयुक्त चाकू एवं अन्य औजारों सहित ऐसी सभी वस्तुएं, जिनका उपयोग आत्महत्या या हिंसा के लिए किया जा सकता है, जेल परिसर में कैदियों की पहुंच में न छोड़ी जाएं तथा औजारों एवं विषैले पदार्थों का सुरक्षित रख-रखाव सुनिश्चित किया जाए। वहीं नियम 300 में प्रावधान है कि आत्महत्या की प्रवृत्ति प्रदर्शित करने वाले कैदियों पर विशेष निगरानी रखी जाए, उन्हें अकेला न छोड़ा जाए तथा मनोवैज्ञानिक सहायता एवं भावनात्मक पुनर्वास हेतु परामर्शदाताओं के पास भेजा जाए। आयोग ने कहा कि इन सुरक्षा प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन हिरासतीय संस्थानों में बंद कैदियों की मानसिक सुरक्षा, कल्याण एवं संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
आयोग ने यह भी स्मरण कराया कि पूर्व में हरियाणा की विभिन्न जेलों, विशेषकर जिला जेल कुरुक्षेत्र, के निरीक्षण के दौरान महिला कैदियों ने बताया था कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक परामर्शदाता केवल महीने में एक बार जेल आते हैं। उस समय आयोग ने जेलों में मनोवैज्ञानिक और मनोरोग विशेषज्ञ की साप्ताहिक विजिट सुनिश्चित करने पर बल दिया था। आयोग ने सिविल सर्जन, कुरुक्षेत्र तथा जेल प्रशासन को इस संबंध में आवश्यक निर्देश भी जारी किए थे और मनोविज्ञान विद्यार्थियों को कैदियों के साथ संवाद कार्यक्रमों में शामिल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।
आयोग ने कहा कि वर्तमान NCRB आंकड़े यह संकेत देते हैं कि जेलों में मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक पुनर्वास के क्षेत्र में अभी भी अधिक सुदृढ़, संरचित और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है। आयोग ने यह भी माना कि ये घटनाएं संयुक्त राष्ट्र के “नेल्सन मंडेला नियमों” सहित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के संभावित उल्लंघन की ओर संकेत करती हैं, जिनमें कैदियों के मानवीय व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण और समुचित स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था को अनिवार्य माना गया है।
अतः जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने निम्नलिखित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है :
- अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार, गृह, जेल, अपराध अन्वेषण एवं न्याय प्रशासन विभाग, चंडीगढ़ :
- जेलों में हिरासत आत्महत्याओं, जेल हिंसा एवं मानसिक स्वास्थ्य संकट की रोकथाम हेतु राज्य स्तर पर अपनाए गए नीतिगत उपाय।
- कैदी कल्याण एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी हरियाणा कारागार नियम, 2022 के प्रावधानों के क्रियान्वयन एवं निगरानी हेतु राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदम।
- जेल प्रशासन को सुदृढ़ करने तथा कैदियों के मानवाधिकारों की सुरक्षा हेतु प्रस्तावित नीतिगत सुधार एवं समन्वय तंत्र।
- अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, चंडीगढ़ तथा महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, हरियाणा,पंचकूला :
- हरियाणा की जेलों में मनोरोग विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों, परामर्शदाताओं, चिकित्सा अधिकारियों एवं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जेलवार उपलब्धता।
- प्रत्येक जेल में मनोरोग विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों, परामर्शदाताओं एवं चिकित्सा अधिकारियों की यात्राओं की आवृत्ति।
- अवसाद, मानसिक आघात, तनाव, नशा मुक्ति लक्षणों, मानसिक रोग अथवा आत्महत्या की प्रवृत्ति से पीड़ित कैदियों की पहचान, उपचार,परामर्श एवं निगरानी हेतु अपनाई गई व्यवस्था।
- जेल विभाग के समन्वय से जेलों में नियमित मनोरोग एवं मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप सुनिश्चित करने हेतु उठाए गए कदम।
महानिदेशक कारागार, हरियाणा, पंचकूला :
- पिछले तीन वर्षों के दौरान जेलवार अप्राकृतिक मौतों, आत्महत्याओं, आत्महत्या के प्रयासों, हिंसक घटनाओं, कैदी झड़पों एवं आग्नेयास्त्र संबंधी घटनाओं का विवरण।
- हरियाणा की सभी जेलों की वर्तमान क्षमता एवं वास्तविक बंदियों की संख्या का विवरण तथा भीड़भाड़ दूर करने हेतु उठाए गए कदम।
- सीसीटीवी निगरानी प्रणाली, आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र, आत्महत्या रोकथाम प्रोटोकॉल, बैरक निगरानी प्रणाली एवं उच्च जोखिम वाले कैदियों की पहचान संबंधी व्यवस्थाओं का विवरण।
- हिरासत हिंसा, कैदी झड़पों, प्रतिबंधित वस्तुओं, मादक पदार्थों, मोबाइल फोन एवं अवैध हथियारों की जेलों में आवाजाही रोकने हेतु अपनाए गए उपाय।
- हरियाणा कारागार नियम, 2022 के नियम 299 एवं 300 के क्रियान्वयन, विशेषकर मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श एवं संवेदनशील कैदियों की निगरानी से संबंधित विवरण।
- परामर्श सुविधाओं, विश्वविद्यालयों के साथ किए गए समझौता ज्ञापनों (MoU), मनोविज्ञान विद्यार्थियों की भागीदारी, नशा मुक्ति कार्यक्रमों, मनोरंजक गतिविधियों, कैदी कल्याण पहलों एवं वर्तमान में संचालित मनोवैज्ञानिक सहयोग प्रणालियों का विवरण।
असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉक्टर पुनीत अरोड़ा ने बताया कि अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह एवं जेल विभाग, हरियाणा; अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग; महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, हरियाणा तथा महानिदेशक कारागार, हरियाणा से रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं| मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।

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