चंडीगढ़, 9 जून। हरियाणा सरकार ने कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए 2,738 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी सतत बागवानी संवर्धन परियोजना (Sustainable Horticulture Enhancement Project) की शुरुआत की है। इसके साथ ही पंचकूला में हरियाणा एग्री बिजनेस एंड कोल्ड चेन सेंटर की आधारशिला भी रखी गई है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने परियोजना का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह पहल किसानों को बेहतर बाजार, आधुनिक भंडारण सुविधाएं और मूल्य संवर्धन के अवसर प्रदान करेगी। इससे फसलों की बर्बादी कम होगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी और एग्री-बिजनेस के क्षेत्र में भी अग्रणी राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य में फल और सब्जियों का एक बड़ा हिस्सा बाजार तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होता है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार खेत से बाजार तक पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करेगी।
परियोजना के तहत आधुनिक कोल्ड चेन नेटवर्क, पैकिंग सुविधाएं, भंडारण केंद्र और उन्नत मार्केटिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। राज्यभर में 400 बागवानी क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे और 500 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा 402 पैक हाउस, 4 लीड पैक हाउस, 3 फुलफिलमेंट सेंटर और 44 रिटेल आउटलेट विकसित किए जाएंगे।
जल संरक्षण को भी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। इसके तहत 1,000 वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण होगा और लगभग 65,000 एकड़ भूमि को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इससे जल संरक्षण के साथ कृषि उत्पादकता में भी वृद्धि होगी।
सरकार परियोजना में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग करेगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, मिट्टी एवं जल विश्लेषण, डिजिटल कृषि सलाह, इंटरनेट ऑफ प्लांट्स, भू-स्थानिक तकनीक और ई-मार्केटिंग जैसी सुविधाएं किसानों को उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे उन्हें फसल प्रबंधन, सिंचाई और बाजार से जुड़ी सटीक जानकारी समय पर मिल सकेगी।
बागवानी क्षेत्र को वैश्विक तकनीकों से जोड़ने के लिए महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल और कोची विश्वविद्यालय, जापान के बीच सहयोग भी स्थापित किया जाएगा। इस साझेदारी से अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान होगा, जिससे किसानों को उन्नत बागवानी तकनीकों का लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि अब केवल खेती तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह तेजी से एक व्यवसाय आधारित क्षेत्र बन रही है। उन्होंने युवाओं को एग्री-बिजनेस, कृषि प्रसंस्करण, खाद्य उद्योग और निर्यात आधारित उद्यमों में आगे आने का आह्वान किया।
सरकार के अनुसार इस परियोजना से 3 लाख से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में 10 से 15 प्रतिशत तक कमी और सप्लाई चेन की दक्षता में 75 प्रतिशत से अधिक सुधार का लक्ष्य रखा गया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और यह परियोजना उस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
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