चंडीगढ़, 9 जून। चंडीगढ़ प्रशासन ने धनास और सारंगपुर स्थित मार्बल मार्केट को सेक्टर-56 (वेस्ट) में विकसित किए जा रहे नए बल्क मैटेरियल मार्केट में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए कारोबारियों का नया सर्वे कराने की योजना बनाई है। प्रशासन का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में व्यापारियों की संख्या में हुए बदलाव को देखते हुए ताजा सर्वे जरूरी हो गया है।
प्रशासन की ओर से सेक्टर-56 (वेस्ट) में लगभग 44 एकड़ क्षेत्र में नया बल्क मैटेरियल मार्केट विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। योजना के तहत 191 एक कनाल के प्लॉट और 48 बूथ साइट विकसित की जानी हैं, जिन्हें लीजहोल्ड आधार पर आवंटित करने का प्रस्ताव है।
हालांकि, कई व्यापारी इन प्लॉटों का आवंटन फ्रीहोल्ड नीलामी के माध्यम से करने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि इस संबंध में अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, परियोजना को अभी पर्यावरणीय मंजूरी (एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस) का इंतजार है। चूंकि परियोजना का निर्मित क्षेत्र 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है, इसलिए पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) नियमों के तहत मंजूरी लेना अनिवार्य है। इसी कारण फिलहाल प्लॉटों की नीलामी प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकी है।
वर्तमान में धनास और सारंगपुर की मार्बल मार्केट करीब 200 एकड़ कृषि भूमि पर संचालित हो रही है। यहां से न केवल चंडीगढ़ बल्कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के ग्राहक भी बड़ी संख्या में खरीदारी करने पहुंचते हैं।
इस बीच प्रशासन ने नए बाजार में बुनियादी ढांचे के विकास की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। सेक्टर-56 स्थित प्रस्तावित मार्केट में सड़कें और पार्किंग विकसित करने के लिए 16.37 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मुख्य अभियंता की मंजूरी के बाद अगले सप्ताह वित्तीय बोलियां खोली जा सकती हैं और कार्य आवंटित किया जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक नया बाजार पूरी तरह विकसित नहीं हो जाता, तब तक किसी भी व्यापारी को स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। सभी आवश्यक सुविधाएं तैयार होने के बाद ही शिफ्टिंग प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में एस्टेट ऑफिस द्वारा किए गए सर्वे में 182 मार्बल कारोबारियों को नए बाजार में आवंटन के लिए पात्र माना गया था। यह सूची पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी प्रस्तुत की जा चुकी है। प्रशासन का अब तक यही रुख रहा है कि केवल उन्हीं कारोबारियों को आवंटन का लाभ मिलेगा जिनकी पहचान पहले सर्वे में की गई थी।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पिछले आठ वर्षों में बाजार की स्थिति काफी बदल चुकी है। कई मूल कारोबारियों ने अपनी जगह किराए पर दे दी है या अन्य व्यापारियों के साथ साझा कर ली है। इसके चलते वर्तमान में कारोबारियों की संख्या 300 से अधिक होने का अनुमान है।
इसी बदलती स्थिति को देखते हुए प्रशासन अब नया सर्वे कराने पर विचार कर रहा है, ताकि वास्तविक रूप से संचालित कारोबारियों की संख्या का पता लगाया जा सके और भविष्य में आवंटन तथा स्थानांतरण के दौरान किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।
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