stock market ranking

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार को वैश्विक स्तर पर बड़ा झटका लगा है। बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइजेशन) के आधार पर दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों की सूची में भारत अब सातवें स्थान पर पहुंच गया है। पहले ताइवान और अब दक्षिण कोरिया ने भारत को पीछे छोड़ते हुए अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।

हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार का कुल मूल्यांकन घटकर करीब 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया है, जबकि दक्षिण कोरिया का बाजार 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है। इसी वजह से भारत वैश्विक रैंकिंग में एक और स्थान नीचे खिसक गया है।

दक्षिण कोरिया की जबरदस्त छलांग

इस वर्ष दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है। वहां सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य करीब 86 प्रतिशत बढ़ा है। इस उछाल के दम पर दक्षिण कोरिया ने कनाडा, जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे बड़े बाजारों को भी पीछे छोड़ दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि देश की प्रमुख तकनीकी और सेमीकंडक्टर कंपनियों ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है।

एआई और सेमीकंडक्टर बूम का असर

दक्षिण कोरिया और ताइवान की तेजी के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर उद्योग का बड़ा योगदान माना जा रहा है। दक्षिण कोरिया में तकनीकी कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला है, जबकि ताइवान को दुनिया की अग्रणी चिप निर्माण कंपनियों का लाभ मिला है।

एआई आधारित तकनीकों की बढ़ती मांग के चलते वैश्विक निवेशकों का रुझान इन बाजारों की ओर बढ़ा है, जिससे उनके बाजार पूंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

भारत क्यों पिछड़ा?

विश्लेषकों के अनुसार भारत के पीछे छूटने के कई कारण हैं:

  • विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
  • डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी
  • एआई और सेमीकंडक्टर क्षेत्र की सीमित उपस्थिति
  • वैश्विक निवेशकों का तकनीकी कंपनियों की ओर बढ़ता झुकाव

इन कारणों ने भारतीय शेयर बाजार के प्रदर्शन पर दबाव बनाया है।

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भारत मजबूत

हालांकि शेयर बाजार रैंकिंग में गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन अर्थव्यवस्था के आकार के मामले में भारत अभी भी दक्षिण कोरिया और ताइवान से काफी आगे है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमान के अनुसार भारत की जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है और देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार की मौजूदा रैंकिंग भारत के लिए एक संकेत है कि भविष्य की तकनीकों, विशेष रूप से एआई और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में निवेश और नवाचार को बढ़ावा देना होगा। वहीं, मजबूत आर्थिक बुनियाद और निरंतर विकास दर के चलते भारत की दीर्घकालिक संभावनाएं अभी भी सकारात्मक बनी हुई हैं।

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