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नई दिल्ली। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में तेजी से बदलते समुद्री हालात एक मजबूत अल नीनो (El Niño) के संकेत दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह प्रणाली पूरी तरह विकसित होती है तो आने वाले महीनों में भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, कमजोर मानसून और मौसम संबंधी असामान्य परिस्थितियां देखने को मिल सकती हैं।

प्रशांत महासागर में बढ़ रही गतिविधियां

वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर के सतही जल का तापमान लगातार बढ़ रहा है। समुद्री तापमान में यह वृद्धि अल नीनो के विकास का प्रमुख संकेत मानी जाती है। मौसम एजेंसियों के अनुसार, जून से इसके प्रभाव दिखाई देने शुरू हो सकते हैं, जबकि वर्ष के अंत तक यह और अधिक मजबूत रूप ले सकता है।

नासा और सैटेलाइट डेटा से मिले संकेत

वैज्ञानिकों को समुद्र के जलस्तर और तापमान में हो रहे बदलावों से महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। आधुनिक उपग्रह प्रणालियों द्वारा किए गए आकलन में प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से में असामान्य गर्म पानी और समुद्री लहरों की गतिविधियां दर्ज की गई हैं, जो अल नीनो के विकसित होने की संभावना को मजबूत करती हैं।

भारत में कमजोर पड़ सकता है मानसून

अल नीनो का सबसे बड़ा प्रभाव मानसून पर पड़ता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इसके कारण भारत में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका रहती है। यदि मानसून कमजोर रहता है, तो इसका असर कृषि उत्पादन, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

बढ़ सकती है रिकॉर्ड तोड़ गर्मी

विशेषज्ञों का अनुमान है कि अल नीनो की स्थिति मजबूत होने पर दुनिया के कई हिस्सों में तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है। भारत में भी हीटवेव की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है और कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है।

क्या होता है सुपर अल नीनो?

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। जब यह तापमान वृद्धि अत्यधिक स्तर तक पहुंच जाती है, तो उसे “सुपर अल नीनो” कहा जाता है। ऐसी स्थिति वैश्विक मौसम पैटर्न को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकती है।

वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है असर

जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत अल नीनो केवल भारत ही नहीं, बल्कि एशिया, अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के कई हिस्सों में मौसम संबंधी चुनौतियां पैदा कर सकता है। कहीं सूखे की स्थिति बन सकती है तो कहीं अत्यधिक गर्मी और असामान्य वर्षा देखने को मिल सकती है।

वैज्ञानिक रख रहे हैं लगातार नजर

मौसम एजेंसियां और वैज्ञानिक संस्थान प्रशांत महासागर की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं। आने वाले महीनों में समुद्री तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों के आधार पर अल नीनो की वास्तविक तीव्रता का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।

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