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किसानों के सच्चे रहबर थे चौधरी छोटूराम : महेंद्र सिंह मलिक

किसान मसीहा की जयंती पर याद किया | महेंद्र सिंह मलिक

पंचकुला , 24 नवंबर –

जाट सभा पंचकुला / चंडीगढ़ के प्रधान डॉक्टर महेंद्र सिंह मलिक ने आज किसान मसीहा चौधरी छोटूराम की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने इस अवसर पर चौधरी छोटूराम द्वारा किसान एवम मजदूरों के हित में किए गए कार्यों को याद किया। उन्होंने बताया कि पराधीन भारत में कृषि की समस्याओं के निदान के लिए संघर्ष किया एवं किसानों के हित में कानून बनवाने का भी काम किया। वे हमारे लिए एक आदर्श और प्रेरणा के स्रोत थे।

महेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि आज ही के दिन 24 नवंबर 1881 में रोहतक में एक बच्चे का जन्म हुआ था जो आगे जाकर भारत का स्वाधीनता सेनानी और राजनेता बना , उसका नाम था छोटूराम । उन्हें गरीबों का मसीहा कहा जाता है। गरीबों के बंधु के रूप में वह ‘रहबर ए आज़म’ कहे जाते थे। उनकी छवि और व्यक्तितत्व से उनका कद बहुत ऊंचा हो गया था।

छोटूराम दीन दुखियों और गरीबों के बंधु, अंग्रेज़ हुकूमत के लिए ‘सर’ तो किसानों के लिए मसीहा थे। चौधरी छोटूराम का वास्तविक नाम राय रिछपाल था, लेकिन परिवार में सभी प्यार से उन्हें ‘छोटू’ कहकर पुकारते थे जिसके बाद स्कूल में भी उनका नाम छोटूराम ही दर्ज कर लिया गया और यहीं से बालक राय रिछपाल का वास्तविक नाम छोटूराम हो गया।

महेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि छोटूराम बहुत ही साधारण जीवन जीते थे और वे अपनी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा स्कूल को दान कर दिया करते थे। वकालत करने के साथ ही उन्होंने 1912 में जाट सभा का गठन किया और प्रथम विश्व युद्ध में उन्होंने रोहतक के 22 हजार से ज्यादा सैनिकों को सेना में भर्ती करवाया। उन्होंने अपना जीवन ‘ दरिद्र किसान ’ की सेवा में समर्पित कर दिया , यहीं कारण है कि हरियाणा के लोग विशेष कृषक समाज का हर व्यक्ति महेंद्र सिंह मलिक का नाम लेते ही श्रद्धा से नत – मस्तक हो जाता हैं।

इस अवसर पर कृष्णा मलिक, जाट सभा के उपाध्यक्ष जयपाल पुनिया, सचिव बी एस गिल, नरेश दहिया, विमल जून समेत अन्य सदस्यों ने भी चौधरी छोटूराम को श्रद्धांजलि दी।

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