investigation and political scrutiny

कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार की महत्वाकांक्षी महिला सहायता योजना ‘लक्ष्मीर भंडार’ को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि योजना में लगभग 30 लाख फर्जी खाते पाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है।

फर्जी खातों की होगी व्यापक जांच

नबान्न सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रारंभिक जांच में बड़ी संख्या में संदिग्ध लाभार्थियों की पहचान हुई है। उनके अनुसार, यह मामला केवल फर्जी लाभार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की संभावना भी हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना का लाभ उन लोगों तक भी पहुंचा जो पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। सरकार अब गांव और वार्ड स्तर तक सत्यापन अभियान चलाकर वास्तविक और फर्जी लाभार्थियों की पहचान करेगी।

महिलाओं की योजना में पुरुषों के लाभ लेने का आरोप

सरकार का दावा है कि जांच के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें महिलाओं के लिए शुरू की गई योजना का लाभ पुरुषों ने कथित तौर पर गलत दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री के अनुसार, कुछ मामलों में कार्रवाई भी की गई है और कई संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है। सरकार का आरोप है कि पूर्व प्रशासन के दौरान योजना के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही हुई।

एसआईटी किन पहलुओं की जांच करेगी?

सरकार के मुताबिक, एसआईटी केवल फर्जी खातों की पहचान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी जांच करेगी कि सरकारी धन किन खातों में भेजा गया और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया।

जांच एजेंसियां बैंकिंग रिकॉर्ड, लाभार्थियों के दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन की भी समीक्षा करेंगी। आवश्यकता पड़ने पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।

जांच के प्रमुख बिंदु

विषयसरकार का दावा
संदिग्ध खातेलगभग 30 लाख
अपात्र लाभार्थीमहिलाओं की जगह पुरुषों को भी भुगतान
वित्तीय अनियमितताअवैध धन हस्तांतरण की आशंका
कार्रवाईकई संदिग्धों पर कार्रवाई

अन्नपूर्णा भंडार योजना पर भी चर्चा

मुख्यमंत्री ने आगामी अन्नपूर्णा भंडार योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नई योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

इस योजना के लिए विस्तृत सत्यापन प्रक्रिया लागू की गई है, जिसमें बहुस्तरीय दस्तावेज जांच शामिल है। सरकार का कहना है कि पिछली योजनाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं को देखते हुए सख्त सत्यापन आवश्यक है।

सरकार ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गलत तरीके से सरकारी लाभ लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लक्ष्मीर भंडार योजना से जुड़े इस विवाद का असर राज्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है। अब सभी की नजरें एसआईटी जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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