उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होना भारत की सांस्कृतिक चेतना, आत्मसम्मान और अटूट आस्था का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कुरुक्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि यह स्वाभिमान पर्व 11 जनवरी 2026 से प्रारंभ हुआ है और 11 जनवरी 2027 तक विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देशभर के राज्यों से जुड़े और सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास से लोगों को अवगत कराया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पर्व का हिस्सा बनना हम सभी के लिए गर्व और सौभाग्य की बात है। उन्होंने प्रदेशवासियों को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देशभर से श्रद्धालुओं की यात्राएं सोमनाथ मंदिर पहुंच रही हैं। हरियाणा सरकार द्वारा भी आगामी 8 जून को श्रद्धालुओं के लिए विशेष ट्रेन सोमनाथ रवाना की जाएगी।
उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं को तीर्थ यात्रा का लाभ देने के उद्देश्य से राज्य सरकार मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना संचालित कर रही है। प्रधानमंत्री की प्रेरणा और मार्गदर्शन में इस पर्व को जन-जन का उत्सव बनाने के लिए भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों से और अधिक मजबूती से जुड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास भारत की धैर्य, संघर्ष और पुनर्जागरण की गाथा है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण हुआ, तब-तब पूरे राष्ट्र की आत्मा आहत हुई, लेकिन हर बार देश ने यह साबित किया कि हमारी आस्था को कोई शक्ति समाप्त नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा कि लौह पुरुष Sardar Vallabhbhai Patel ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था और वर्ष 1951 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति Rajendra Prasad ने मंदिर का उद्घाटन किया था। यह केवल अतीत का स्मरण नहीं, बल्कि विकसित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत के भविष्य का संकल्प भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार भी प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के जीर्णोद्धार एवं विकास के लिए विशेष योजनाएं चला रही है। उन्होंने बताया कि स्वदेश दर्शन योजना के तहत वर्ष 2015 में कुरुक्षेत्र को श्रीकृष्ण सर्किट में शामिल किया गया था।
अंत में मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा ले सकें।
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