चंडीगढ़, 21 जून। हरियाणा के बिजली लोकपाल राकेश कुमार खन्ना ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों को 15 दिन के भीतर उपभोक्ता से वसूल की जाने वाली बकाया राशि का अंतिम एवं सत्यापित आंकड़ा निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश गुरुग्राम निवासी करमचंद गोगिया द्वारा दायर अपील की सुनवाई के दौरान पारित किया गया।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित सुनवाई में लोकपाल ने पाया कि डीएचबीवीएन के अधिकारी कई अवसर दिए जाने के बावजूद पुराने बिजली कनेक्शन से संबंधित आवश्यक रिकॉर्ड(अभिलेख), एम एंड पी जांच रिपोर्ट, लेजर विवरण तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं। इस कारण मामले के निस्तारण में अनावश्यक विलंब हुआ है।
अंतरिम आदेश में लोकपाल ने कहा कि रिकॉर्ड के स्थानांतरण अथवा बिलिंग एजेंसी बदलने का तर्क निगम को अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं करता। बिजली अधिनियम, 2003 तथा हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के नियमों के अनुसार उपभोक्ताओं से संबंधित अभिलेखों का सुरक्षित और सुलभ रूप में (मेन्टेन) संधारण करना बिजली निगम की जिम्मेदारी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजली लोकपाल ने डीएचबीवीएन के निदेशक (ऑपरेशन), हिसार को निर्देश दिए हैं कि वे अपने कार्यालय अथवा किसी उपयुक्त स्थान पर एक विशेष समन्वय बैठक अथवा शिविर आयोजित करें। इस बैठक की अध्यक्षता कॉरपोरेट उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (सीजीआरएफ), यूएचबीवीएन के अध्यक्ष करेंगे।
बैठक में आईटी, कमर्शियल बैक ऑफिस, एम एंड पी, विजिलेंस, ऑपरेशन, ऑडिट तथा अन्य संबंधित शाखाओं के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन अधिकारियों को उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान कर, आवश्यकतानुसार गुम डेटा का पुनर्निर्माण करते हुए, डीएचबीवीएन सेल्स मैनुअल-2013 के प्रावधानों के अनुरूप उपभोक्ता पर देय अंतिम बकाया राशि निर्धारित करनी होगी।
लोकपाल ने स्पष्ट किया कि सभी अधिकारी तब तक कार्य करेंगे जब तक कि उपलब्ध दस्तावेजों और उचित तर्कों के आधार पर अंतिम एवं ऑडिटेड आंकड़ा निर्धारित नहीं हो जाता। इस पूरी प्रक्रिया को आदेश जारी होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर पूरा करना होगा तथा इसके तीन दिन के भीतर कॉरपोरेट सीजीआरएफ के अध्यक्ष को बैठक की कार्यवाही और अंतिम सत्यापित आंकड़ा बिजली लोकपाल को प्रस्तुत करना होगा।
लोकपाल ने यह भी चेतावनी दी है कि प्रतिवादियों (रेस्पोंडेंटस) को पहले ही पर्याप्त अवसर दिए जा चुके हैं। यदि भविष्य में आदेशों के अनुपालन में कोई और देरी अथवा लापरवाही पाई जाती है तो हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (फोरम एवं लोकपाल) विनियम, 2020 के तहत लागत आरोपित करने सहित अन्य उपयुक्त कार्रवाई की जा सकती है।
मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 को प्रातः 11 बजे बिजली लोकपाल, हरियाणा के पंचकूला स्थित कार्यालय में होगी। लोकपाल ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी पक्ष की ओर से उपस्थिति नहीं होती है तो मामले की सुनवाई एकपक्षीय रूप से आगे बढ़ाई जाएगी।
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