नई दिल्ली/पेरिस। दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। एंग्जायटी, डिप्रेशन और अन्य मानसिक विकारों से प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ने के बीच फ्रांस में एक अनोखी थेरेपी चर्चा का विषय बनी हुई है। पेरिस के एक मनोरोग अस्पताल में मरीजों के इलाज और मानसिक संतुलन सुधारने के लिए गधों की मदद ली जा रही है, जिसे विशेषज्ञ “एनिमल थेरेपी” का प्रभावी रूप मान रहे हैं।
दुनिया में बढ़ रहा मानसिक बीमारियों का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसिक रोग अब वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुके हैं। विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि दुनिया की बड़ी आबादी किसी न किसी मानसिक विकार से प्रभावित है। एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं युवाओं और किशोरों में तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है।
गधे बने ‘हैप्पीनेस थेरेपिस्ट’
फ्रांस के एक मनोरोग अस्पताल में मरीजों को नियमित चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक उपचार के साथ गधों के साथ समय बिताने का अवसर दिया जाता है। अस्पताल परिसर में प्राकृतिक वातावरण तैयार किया गया है, जहां मरीज गधों के साथ घूमते हैं, उनकी देखभाल करते हैं और उनके साथ भावनात्मक जुड़ाव विकसित करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जानवरों के साथ यह संपर्क मरीजों को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन प्रदान करता है।
मरीजों को मिल रहा सकारात्मक अनुभव
इस कार्यक्रम में शामिल कई मरीजों ने बताया कि गधों के साथ समय बिताने से उन्हें तनाव कम करने और मानसिक राहत पाने में मदद मिली है। कुछ मरीजों ने इसे “एनिमल मेडिसिन” तक का नाम दिया है क्योंकि यह उन्हें दवाओं की तरह सुकून और आराम का अनुभव कराता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, थेरेपी के दौरान मरीज वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करना सीखते हैं, जिससे चिंता और नकारात्मक विचारों में कमी आती है।
कैसे काम करती है एनिमल थेरेपी?
मनोचिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि गधे स्वभाव से शांत, धैर्यवान और इंसानों के साथ सहज संबंध बनाने वाले जानवर होते हैं। मरीजों और जानवरों के बीच बनने वाला भावनात्मक जुड़ाव आत्म-सम्मान बढ़ाने, सामाजिक संवाद सुधारने और अकेलेपन की भावना कम करने में मदद करता है।
इस कार्यक्रम में प्रत्येक मरीज को एक विशेष जानवर के साथ जोड़ा जाता है ताकि समय के साथ उनके बीच विश्वास और अपनापन विकसित हो सके।
सिर्फ गधे ही नहीं, अन्य जानवर भी शामिल
वर्ष 2022 में इस कार्यक्रम को आधिकारिक स्वास्थ्य सेवा इकाई का दर्जा दिया गया। इसके बाद इसका विस्तार किया गया और अब इसमें गिनी पिग, खरगोश, बकरियां, कबूतर, मुर्गियां और कछुए जैसे अन्य जानवर भी शामिल किए गए हैं। मरीजों की जरूरत और मानसिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग सत्र तैयार किए जाते हैं।
दवाओं का विकल्प नहीं, लेकिन प्रभावी सहयोग
विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि एनिमल थेरेपी पारंपरिक चिकित्सा या दवाओं का विकल्प नहीं है। हालांकि यह उपचार प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है। ऐसे सत्र मरीजों को आत्मविश्वास वापस पाने, सामाजिक रूप से सक्रिय होने और मानसिक रूप से मजबूत बनने में सहयोग देते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी वैकल्पिक और सहायक थेरेपी मानसिक स्वास्थ्य देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं।
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