चंडीगढ़, 9 जून। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने मंगलवार को ‘अकाली दल (वारिस पंजाब दे)’ संगठन में शामिल होने की घोषणा की। संगठन में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा कि पंजाब से जुड़े मुद्दों, बंदी सिखों की रिहाई और खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की रिहाई उनके प्रमुख एजेंडों में शामिल होंगे।
चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘वारिस पंजाब दे’ के कार्यकारी अध्यक्ष और अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने मनप्रीत अयाली का संगठन में स्वागत किया। इस मौके पर ‘वारिस पंजाब दे’ के संस्थापक दिवंगत दीप सिद्धू के भाई मनदीप सिंह सिद्धू सहित संगठन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
मनप्रीत अयाली ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह शिरोमणि अकाली दल से इस्तीफा नहीं देंगे और विधायक के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि ‘वारिस पंजाब दे’ अभी एक पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है, इसलिए उनकी विधानसभा सदस्यता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मीडिया से बातचीत में अयाली ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ किसी भी संभावित गठबंधन की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन पंजाब के हितों से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से उठाएगा।
अयाली ने कहा कि उन्होंने पंजाब, सिख समुदाय और चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने जैसे मुद्दों को लेकर ‘वारिस पंजाब दे’ के साथ हाथ मिलाया है। उन्होंने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को लेकर भी सवाल उठाए और इसे पंजाब के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।
इस अवसर पर तरसेम सिंह ने कहा कि ‘अकाली दल (वारिस पंजाब दे)’ का गठन पंजाब के युवाओं को नशे और बेरोजगारी से बचाने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने कहा कि यह संगठन दीप सिद्धू के विचारों और मिशन को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
तरसेम सिंह ने अमृतपाल सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि वह निर्दोष हैं और उन्हें गलत तरीके से हिरासत में रखा गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता ने अमृतपाल सिंह को लोकसभा भेजकर अपना समर्थन स्पष्ट कर दिया है, लेकिन अभी तक उन्हें रिहा नहीं किया गया है और वे संसद की कार्यवाही में भी भाग नहीं ले पा रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि संगठन ने विभिन्न पंथक नेताओं और अन्य सिख संगठनों को साथ लाने का प्रयास किया था, लेकिन यह सफल नहीं हो सका। अब संगठन समान विचारधारा वाले नेताओं को जोड़कर अपना विस्तार करेगा।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों को लेकर भी चर्चा की और कहा कि आने वाले समय में संगठन राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में अपनी भूमिका मजबूत करने का प्रयास करेगा।
फिलहाल मनप्रीत सिंह अयाली के इस फैसले को पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, जिस पर विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की नजर बनी हुई है।
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