ola and taxi strike

चंडीगढ़, 9 जून। चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला (ट्राइसिटी) में ऐप आधारित कैब सेवाओं से सफर करने वाले यात्रियों को अगले कुछ दिनों तक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। Ola, Uber और InDrive से जुड़े कैब चालकों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जो 16 जून तक जारी रहेगा।

प्रदर्शन कर रहे चालक रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक कोई भी राइड स्वीकार नहीं करेंगे। इस फैसले से ट्राइसिटी में रोजाना यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। अनुमान है कि 50 हजार से अधिक लोग इस हड़ताल से प्रभावित हो सकते हैं।

कैब चालकों ने सेक्टर-25 रैली ग्राउंड में एकत्र होकर अपनी मांगों को दोहराया। उनका मुख्य आरोप है कि चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा अधिसूचित एग्रीगेटर पॉलिसी-2025 को अभी तक जमीन पर लागू नहीं किया गया है। उनका कहना है कि नीति लागू होने से ड्राइवरों के हितों की रक्षा होगी और ऐप आधारित परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।

चालकों का कहना है कि कई दौर की बैठकों और वार्ताओं के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।

किराया बढ़ाने की भी मांग

प्रदर्शनकारी चालक मौजूदा किराया दरों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई, सीएनजी और ईंधन की कीमतों, वाहन ऋण की किस्तों, बीमा, सर्विसिंग और अन्य खर्चों के कारण वर्तमान किराया संरचना आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं रह गई है।

चालकों का दावा है कि मौजूदा दरों पर काम करने के बाद उनके पास बहुत कम बचत रह जाती है। इसी वजह से वे प्रति किलोमीटर किराया बढ़ाकर 35 रुपये करने की मांग कर रहे हैं।

भारी कमीशन से नाराज चालक

एक अन्य प्रमुख मुद्दा ऐप कंपनियों द्वारा वसूला जाने वाला कमीशन है। चालकों का आरोप है कि विभिन्न शुल्कों और कमीशन के नाम पर उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा काट लिया जाता है। उनका कहना है कि कई बार उन्हें लक्ष्य पूरा करने के लिए 14 से 16 घंटे तक लगातार काम करना पड़ता है, जिससे स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा दोनों प्रभावित होते हैं।

अवैध बाइक टैक्सी संचालन पर भी उठाए सवाल

प्रदर्शनकारी चालकों ने निजी वाहनों और बिना अनुमति संचालित हो रही बाइक टैक्सी सेवाओं पर भी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि वैध कमर्शियल कैब चालक जहां टैक्स और परमिट शुल्क जमा करते हैं, वहीं कुछ प्लेटफॉर्म निजी वाहनों को व्यावसायिक रूप से संचालित करवा रहे हैं, जिससे असमान प्रतिस्पर्धा पैदा हो रही है।

यात्रियों ने सार्वजनिक परिवहन का रुख किया

कैब सेवाएं प्रभावित होने के बाद कई यात्रियों ने चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (CTU) की बसों और ऑटो-रिक्शा का सहारा लेना शुरू कर दिया है। हालांकि यात्रियों को आशंका है कि मांग बढ़ने के कारण कुछ स्थानों पर ऑटो चालक अधिक किराया वसूल सकते हैं।

सबसे ज्यादा परेशानी अस्पतालों, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों तक आने-जाने वाले यात्रियों को हो सकती है। पीजीआईएमईआर, जीएमसीएच-32, चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन और आईएसबीटी-17 तथा 43 तक पहुंचने वाले यात्रियों पर इसका विशेष असर पड़ने की संभावना है।

प्रशासन से समाधान की उम्मीद

कैब यूनियनों ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी हड़ताल फिलहाल 16 जून तक जारी रहेगी। ऐसे में अब यात्रियों और आम लोगों की नजरें चंडीगढ़ प्रशासन और परिवहन विभाग पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए जल्द कोई समाधान निकाला जाएगा, ताकि ट्राइसिटी की परिवहन व्यवस्था सामान्य हो सके।

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