मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एकनाथ शिंदे गुट के नेताओं को पार्टी में वापसी का खुला प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि यदि 2022 में पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को अपनी गलती का एहसास हो रहा है, तो वे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना में वापस आ सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ नेताओं के लिए पार्टी के दरवाजे हमेशा के लिए बंद रहेंगे।
मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राउत ने कहा कि जो नेता खुद को गुमराह महसूस कर रहे हैं या जिन्हें लगता है कि उनसे गलत फैसला हुआ था, उन्हें बिना संकोच शिवसेना (यूबीटी) में लौट आना चाहिए। उन्होंने भाजपा पर सहयोगी दलों को कमजोर करने और उनका सम्मान न करने का आरोप भी लगाया।
अब्दुल सत्तार के बयान के बाद बढ़ी सियासी चर्चा
राउत की यह टिप्पणी शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार के हालिया बयान के बाद आई है। सत्तार ने आरोप लगाया था कि भाजपा पहले शिवसेना (यूबीटी) को कमजोर करने में लगी रही और अब शिंदे गुट की शिवसेना को भी नुकसान पहुंचा रही है, विशेषकर छत्रपति संभाजीनगर जिले में।
उन्होंने यह भी कहा था कि यदि सहयोगी दल ही एक-दूसरे को कमजोर करने लगें तो गठबंधन का कोई औचित्य नहीं रह जाता। साथ ही उन्होंने दोनों शिवसेना गुटों के संभावित पुनर्मिलन की संभावना पर भी संकेत दिए थे।
भाजपा पर साधा निशाना
संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा कभी भी मूल भगवा गठबंधन की प्रमुख पार्टी नहीं रही। उनके अनुसार, अविभाजित शिवसेना गठबंधन का नेतृत्व करती थी और भाजपा इस स्थिति को स्वीकार नहीं कर पाई। उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से शिवसेना में विभाजन की स्थिति पैदा हुई।
राउत ने यह भी कहा कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना स्वतंत्र राजनीतिक पहचान नहीं रखती और कई फैसले बाहरी प्रभाव में लिए जा रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए और विश्वास जताया कि शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला उद्धव ठाकरे के पक्ष में आएगा।
सुषमा अंधारे ने भी दी प्रतिक्रिया
शिवसेना (यूबीटी) की प्रवक्ता सुषमा अंधारे ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही भाजपा की कार्यशैली को लेकर सतर्क थी। उन्होंने कहा कि सत्ता और राजनीतिक लाभ की वजह से कुछ नेताओं ने अलग राह चुनी थी, लेकिन अब कई लोगों को वास्तविक स्थिति का एहसास हो रहा है।
महाराष्ट्र की राजनीति में इस बयान के बाद दोनों शिवसेना गुटों के संबंधों और भविष्य की संभावनाओं को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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