चंडीगढ़: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच अपने सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी क्रम में CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने चंडीगढ़ में एक उच्चस्तरीय परिचालन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें उत्तरी क्षेत्र और देश के हवाई अड्डों की सुरक्षा तैयारियों का व्यापक आकलन किया गया।
ड्रोन और एंटी-सैबोटेज सुरक्षा पर विशेष चर्चा
बैठक का मुख्य फोकस ड्रोन हमलों, संदिग्ध हवाई गतिविधियों और संभावित तोड़फोड़ विरोधी सुरक्षा उपायों को मजबूत करना रहा।
अधिकारियों ने सीमावर्ती राज्यों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों के सामने उभर रही नई चुनौतियों की समीक्षा करते हुए सुरक्षा रणनीतियों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। विशेष रूप से कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और मानवरहित हवाई प्रणालियों से निपटने की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सेना के सहयोग से चल रहा विशेष प्रशिक्षण
CISF ने भारतीय सेना के सहयोग से चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत जवानों को:
- संदिग्ध ड्रोन की पहचान
- हवाई गतिविधियों की निगरानी
- लक्ष्य को ट्रैक करने की तकनीक
- संभावित खतरों को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया
जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
सीमावर्ती राज्यों की सुरक्षा पर विशेष नजर
बैठक में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात जैसे सीमावर्ती राज्यों की सुरक्षा स्थिति की भी समीक्षा की गई।
अधिकारियों ने हाल के समय में सामने आई ड्रोन गतिविधियों, संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन तैयारियों का मूल्यांकन किया। सीमावर्ती इलाकों में तकनीकी निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया।
सेना और NDRF के साथ संयुक्त अभ्यास
सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए CISF लगातार भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ संयुक्त अभ्यास कर रही है।
इन अभ्यासों का उद्देश्य:
- आतंकवाद विरोधी अभियान क्षमता बढ़ाना
- आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना
- सुरक्षा बलों के बीच समन्वय मजबूत करना
है।
एयरपोर्ट सुरक्षा में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
बैठक के दौरान देश के हवाई अड्डों पर लागू की जा रही आधुनिक सुरक्षा तकनीकों की भी समीक्षा की गई।
इनमें शामिल हैं:
डिजी यात्रा और बायोमेट्रिक सत्यापन
यात्रियों की पहचान प्रक्रिया को तेज, सुरक्षित और पेपरलेस बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।
फुल बॉडी स्कैनर और स्मार्ट वीडियो एनालिटिक्स
उन्नत सुरक्षा जांच और संदिग्ध गतिविधियों की रियल टाइम पहचान में सहायक।
पेरीमीटर इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम
एयरपोर्ट की बाहरी सुरक्षा को मजबूत करने और घुसपैठ रोकने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था।
बम डिटेक्शन और सुरक्षा उपकरण
संभावित विस्फोटक खतरों की पहचान और त्वरित निष्क्रियकरण के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग।
त्वरित प्रतिक्रिया दल की क्षमता बढ़ाने पर जोर
CISF ने एयरपोर्ट सुरक्षा में तैनात क्विक रिएक्शन टीम (QRT) और विशेष कमांडो इकाइयों की क्षमता बढ़ाने के लिए भी व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।
अधिकारियों के अनुसार सैकड़ों सुरक्षा कर्मी विशेष युद्धक और प्रतिक्रिया प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। लक्ष्य है कि आने वाले समय में देश के सभी प्रमुख हवाई अड्डों पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को उन्नत प्रशिक्षण से लैस किया जाए।
बदलती चुनौतियों के अनुरूप सुरक्षा रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक, साइबर खतरों और आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों के दौर में एयरपोर्ट और राष्ट्रीय प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए तकनीकी और मानव संसाधन दोनों स्तरों पर लगातार सुधार आवश्यक है।
चंडीगढ़ में हुई यह समीक्षा बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाना है।
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